माइग्रेन के लक्षण और उपाय

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कहते हैं कि सौ दवा से एक परहेज अच्छा। तो आज हम आपको माइग्रेन जैसी दर्द देने वाली बीमारी से मुक्ति पाने के लिए माइग्रेन के लक्षण और उपाय दोनों बता रहे हैं। ताकि आप माइग्रेन नामक इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पा सको।

माइग्रेन क्या होता है?

‘माईग्रेन’ (migraine) मस्तिष्क से सीधा संबंध रखने वाली बीमारी हैं। माइग्रेन हिंदी में “सिरदर्द”, “आधा शीशी”, “आधे सिर का दर्द”, “अधकपारी” जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है।

प्रायः हम इस सिरदर्द को सामान्य रूप में लेते हैं । जरा सा सिरदर्द हुआ की नहीं मेडिकल से medicine लेकर खा लेते हैं , किन्तु थोड़ी से असावधानी के कारण इसके गम्भीर परिणामों से भी गुजरना पड़ सकता हैं।

माइग्रेन कितने प्रकार का होता है?

सामान्यत: माइग्रेन तीन प्रकार के होते हैं
माइग्रेन मस्तिष्क के अंदर रक्तवाहिनी ( Artery) के मार्ग में आनेवाली गतिरोध का परिणाम है। माईग्रेन के रोगियों को हमेशा सिरदर्द की शिकायत बनी रहती हैं।
यह दर्द कभी कभी बहुँत भयानक रूप ले लेता हैं। जिससे व्यक्ति बहुँत ज्यादा परेशांन हो जाता हैं।

विशेष माइग्रेन (Typical Aura Migraine) के लक्षण (Symptoms)

विशेष माइग्रेन होने पर रोगी (Patients) को नज़र धुंधलना , कमजोर होना , बोलने में परेशानी होना , चक्कर आना , किसी चीज़ को छूकर भी इसे न पहचान पाना आदि लक्षण पाये जाते हैं।

इन लक्षणों के कुछ देर बाद ही रोगी के सर में बहुँत तेज दर्द शुरू होता हैं । यह दर्द मस्तिष्क के एक ही भाग में रहता हैं । दर्द उठने के बाद कभी-कभी उलटी भी होने की संभावना रहती हैं।

साधरण माइग्रेन (Common Migraine) के लक्षण (Symptoms)

साधारण माइग्रेन होने पर रोगी को बार – बार सर में दर्द पैदा होता हैं । किन्तु बिना संकेत के इसका दर्द भयानक होता ही जो विशेष माइग्रेन से कम नहीं माना जा सकता हैं। दर्द उठने पर छटपटाहट का अनुभव होता हैं।इस तरह के माइग्रेन में Patents को अनिंद्रा , अरुचि, घुटन बैचैनी आदि का अनुभव महसूस होता हैं।

कभी-कभी आनेवाला माइग्रेन

कभी-कभी आनेवाले माइग्रेन कुछ समय के अंतराल पर आता हैं जैसे साल , महीने , कुछ दिन , कुछ घण्टे आदि पर यह आ सकता हैं। इसमें ज्यादातर रोगी की आँखें लाल हो जाती हैं , आखों से पानी आने लगता हैं , आँखों में दर्द शुरू हो जाता हैं। धुंधलापन भी इसका एक लक्षण हैं।

दोस्तों वैसे तो इस बीमारी के होने की कोई आयु नहीं होती हैं। यह किसी भी अवस्था में किसी भी व्यक्ति को हो सकता हैं। Scientific नजरिए से देखा जाये तो यह छोटे बच्चे से लेकर अधिक उम्र के वृद्ध को भी हो सकता हैं। 20 वर्षो तक की आयु वाले युवकों की अपेक्षा युवतियों इससे ज्यादा ग्रस्त रहती हैं।

माइग्रेन के लक्षण

इस समस्या से पीड़ित रोगी में सरदर्द हल्का भी हो सकता है या फिर यह बहुँत तेज भी हो सकता हैं। यह दर्द लगातार भी चल सकता हैं या फिर रुक-रुक कर भी चलता हैं।

इस दर्द से रोगी अपने सर के अंदर हथौड़े जैसी मार का तो, कभी कभी सुई जैसे चुभन का भी अनुभव करता हैं ।

माइग्रेन का अगर इलाज न किया जाये तो यह काफी दिनों तक रहता हैं। इस वजह से सर से सम्बंधित दूसरी भी बीमारियां होने की संभावना रहती हैं। यदि अधकपारी से सम्बंधित रोगियों पर Research किया जाये तो पता चलेगा कि प्रत्येक मरीज़ के बीमार होने कारण अलग – अलग हैं।

किन्तु कुछ कारक है जो Common है , जैसे कामकाज का रूटीन बदलना , अत्यधिक नींद आना या फिर नींद का न आना , तनाव , तेज रोशनी, उत्तेजना , अत्यधिक मेहनत या व्यायाम ( Exercise ) , मौसम का Change होना, हॉर्मोन्स (Hormones) की गड़बड़ी ,  जैसे गर्भावस्था ( pregnancy ) आदि ।

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माइग्रेन को कैसे ठीक करें

इस जैसी ख़तरनाक बीमारी से निज़ात पाने के लिए कुछ बातों का ख्याल रखना चहीए। जैसे

1) सर्वप्रथम  हमे माइग्रेन के दर्द का हिसाब रखना होगा, जिससे दर्द के शुरू होने या समाप्त होने का पता चल सकें। रोज खाने ( Foods ) की सामग्री की मात्रा , माहौल, दिनचर्या आदि का एक Timetable बना लीजिए। जिससे माइग्रेन की Symptoms का पता लगाया जा सकें।

2) बहार निकलते समय धुप के चश्मे का Use करें। Migraine से Related दवाईयां साथ रखें। मेडिसिन लेने के बाद भरपूर नींद ले। तनाव और चिंता से हमेशा दुरी बनाये रखे , यह आपको माइग्रेन से छुटकारा पाने में बहुँत सहायक होंगे। सर पर प्रतिदिन तेल की मालिश अवश्य करें।

3) कभी भी खाली पेट घर से बहार न निकलें। क्योंकि बेवक़्त खाना खाने से भी इसकी सुरुवार हो सकती हैं। ज्यादा तेल में तलि भुनि चीज़े, शराब , मीठी चीज़ों से जैसे चॉक्लेट से परहेज़ करें।

अधिक गर्म जगह या ठंडी जगह रहने से भी माइग्रेन शुरू होने की संभावना होती हैं। यदि माइग्रेन की वजह से सरदर्द  अधिक समय या लगातार रहें तो तो डॉक्टर से मिलकर सलाह अवश्य लीजिये।

4) दिनचर्या का सही से उपयोग कीजिये । समय पर भोजन कीजिए। रोज एक ही समय पर सोने के लिए Bed पर जाए, और अगली सुबह निर्धारित समय पर जग जाये।

5) एक डॉयरी बना लीजिये , उसमे अपने कमजोरियां को लिखें जिसके चलते आपको माइग्रेन आता हैं। इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।

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6) Migraines Treatment plan का अनुसरण कीजिये। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी Medicine मत लीजिये। उस जगह जाए , जहा आपको जाना अच्छा लगता हो। तनाव भरी जवाहर से दुरी बनाये रहें या कम जाएं।

7) आजकल योगा की बहुँत चर्चा हैं , वैसे भी योग हमारे शारीरक स्वास्थ के लिए बहुत जरुरी हैं। किसी अच्छे ट्रेनर से सलाह लेकर योग भी किया जा सकता हैं । Meditation से भी माइग्रेन में लाभ मिलता हैं ।

8)  आराम और अच्छी नींद से भी लाभ मिलता हैं। यदि आप किसी जगह काफ़ी देर से बैठे हैं तो , खड़े हो जाईये और Body के Parts जैसे कंधा , गर्दन , पैर को धीरे- धीरे से हिलाइए।

9) सप्ताह के ज्यादा दिन या फिर हो सकें तो Daily  Exercise के लिए 30 मिनिट निकालिये। इससे आपके शरीर में फुर्ती बनी रहेगी और आपके शारीर में रक्त का प्रवाह भी सही ढंग से होता रहेगा।

याद रखिये मस्तिष्क के रक्तवाहिनियों में खून के प्रवाह में आई रुकावट ही मुख्य करण होता हैं माइग्रेन के लिए। इसलिए व्यायाम को अपने जिंदगी में महत्त्व देना बेहद जरुरी हैं।

NOTE : बिना डॉक्टर की सलाह लिए किसी भी प्रकार की दवा का सेवन न करें।

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